मालूम नहीं

यह जो लड़ाई थी,
जिसमें शामिल न तुम थे,
न हम थे,
फिर भी न जाने क्यों ये गरदीस थी?
ये मौसम कि रूहानियत थी,
वो हवा कि सर- सराती हुई बेरूखी थी,
और सांसों की गिनती भी कम थी,
और ऐसे में भी,
तुम्हारा न आना तय था।

मैं आज कि नहीं, उन लम्हों कि बात कर रहा हूं,
जब तुमने, छुआ था मेरे दिल के इस तार को,
और बड़ी मासूमियत से, तोड़ा था उस दिल के हाल को,
सच कहता हूं , वो जो वक्त ठहरा था मेरे आस-पास,
उसकी याद, आज भी आंखें नम कर जाती है,
शायद,
वह समर जो दुनिया वाले भूल चुके हैं,
वो दंगे, वो लड़ाई, आज भी होती है,
मेरे दिल के इस दरवाजे पे।

कितना समझाया इसे, पर यह मानता भी तो नहीं है,
तैयार है ये,
उन धूल खाते दर्द को फिर से तरोताजा करने को,
जो अपनी निशाना छोड़ गई थी बरसों पहले,
मालूम नहीं,
ये उस दर्द को इक बार फिर से झेल पाएगा कि नहीं,
मालूम नहीं,
ये उस जुदाई को फिर से सह पाएगा कि नहीं,
मालूम नहीं,
ये उन आंखों से गिरते हुए आंसू को फिर से रोक पाएगा कि नहीं,
मालूम नही,
ये सांसों की गिरती हुई रफ्तार को फिर से जोड़ पाएगा कि नहीं,
मालूम नहीं………… मालूम नहीं
पर तैयार है यह,
आज एकबार फिर से उस की दस्तखत के लिए।


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तुम हो कौन ?

अगर इश्क़ कोई जुर्म नहीं, फिर ये सजा क्यों।
और है नफरत, तो भारत-पाकिस्तान सा रिश्ता क्यों ।।

अगर दर्द कोई है तेरे दिल में, फिर ये बात क्यों।
और है सुकुन, तो ये अस्पताल क्यों।।

अगर रंज कोई है तेरे सोच में, फिर ये तंज क्यों।
और है गीत , तो ये तीर क्यों।।

अगर हो कोई फूल तुम, फिर इतनी दूर्गन्ध क्यों।
और हो कांटा, तो लैला- मजनू सा इश्क क्यों।।

अगर टूटती – बिखरती सी कोई ख्वाब हो तुम, फिर ये अपनापन वाला राबता क्यों।
और हो हकीकत , तो मैं तनहा क्यों।।

अगर अजनबी सी कोई हो तुम, फिर तुम्हें खोने का डर क्यों।
और हो मेरी, तो ये सौतेलापन क्यों। ।

अगर गुनाह सी कोई हो तुम, फिर तुम्हारे पास होने पे इतना सुकुन क्यों।
और हो इबादत, तो ये घबराहट क्यों।।

अगर परेशानी हो कोई तुम, फिर तुम्हारा इतने बेसब्री से इंतजार क्यों।
और हो मददगार , तो बात- बात पर ये पत्थर क्यों।।

अगर झूठ सी कोई हो तुम , फिर सीने में तुम्हारे होने का एहसास क्यों।
और सच हो, तो तुम हो कौन ?

Continue reading तुम हो कौन ?

If I’ll Be A Glass Of Water

If I’ll be a glass of water,
Would you drink me?

Would you take a chance to quench your thirst,
In Love’s desert?

Would you consume that life giving drink,
And allow me to flow through your veins,
To nourish you,
To become a part of you,
To explore the very depths of your soul and cleanse the pains and aches that burden you deeply .

Would you allow me to bring moisture to your parched lips that crave to be kissed?
To bathe your heart in a love that’s pure,
Not tainted with ulterior motives –
Just a clear gift with no additives.

If I’ll be a glass of water,
Would you drink me?

Would you allow me to dance across your tongue to bring life to it,
And teach it how to speak the language of my love?

Would you allow me to trickle down your throat,
And give you the urge to speak words you are too afraid to say?

Would you allow me to cool
your temperature –
Hot from the yearning in Love’s desert?

My love,
If I’ll be a glass of water,
Would you drink me?


Continue reading If I’ll Be A Glass Of Water

तेरे चेहरे की तारीफ़ है!

तेरे चेहरे की क्या तारीफ़ है हर चीज़ इसकी बड़ी बारीक है,
होठों पर बिखरी ये मुस्कान है करतीं ये लाखों का नुकसान है,
नाक के ऊपर कजरारी आँखें है जो सबको उलझाती हैं।

पर जनाब,
ये चेहरा तो सिर्फ नकाब है ये तो मासूमो को फ़साने का जाल है,
कई लोगों को इस चेहरे के न मिलने का मलाल है,
हर कोई इस चेहरे का दीवाना है सभी को इस चेहरे को पाना है।

इस नकाब जैसे चेहरे में बड़ी जादूगरी है धोकेबाज़ी इसमें भरी पड़ी है,
जनाब बच के रहना इस धोकेबाज़ चेहरे से इसमें मासूमियत बड़ी है ,
फिर भी, तेरे चेहरे की क्या तारीफ़ है हर चीज़ इसकी बड़ी बारीक है !!


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क्या मुझसे मिलने आयी हो?

क्या मुझसे मिलने आयी हो? कह दो ना तुम,
एक बार के लिए ही सही,
बस कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो,
सच कहता हूं,
कोई और कारण रोक नहीं पाएगा मुझे,
तुमसे मिलने से,
बस तुम एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो।

सच कहता हूं,
अब मुझे फर्क नहीं पड़ता है कि तुम अकेले आयी हो,
या फिर किसी के साथ आयी हो,
बस कह दो कि मुझसे मिलने आयी हो।

शायद तुम्हें याद नहीं, पर उस दिन कि बातें जो अधूरी रह गई थी हमारे बीच वो अब भी बाकी है,
वो तुम्हारी रखी आधी चाय, उस दिन जो फ़ोन के चक्कर में तुमने छोड़ दी थी वो अब भी बाकी है,
वो तुम्हारा लुडो खेलना मेरे साथ और जीत जाने पर बरी मासुमियत से चिढ़ाना मुझे अब भी बाकी है,
वो मेरे साथ लड़ाई, वो खट्टी-मीठी नोक-झोंक ही सही पर वो सब अब भी बाकी है,
शायद तुम्हें याद नहीं पर वह तुम्हारी टूटी चप्पल सिलने के बाद अभी भी तुम्हारी राह देख रही है,
वो मेरी डायरी पे तुमने जो अधूरी चित्रकारी की थी वो भी पूरा होने के लिए तुम्हारे हाथों से बैचैन हो रही है,
वो उस दिन तुम्हारे साथ जब घूम रहा था तब तुम्हारा हाथ अपने हाथों में डालकर घूमना बाकी रह गया था वो अब भी बाकी है,
तुम्हे याद है कि नहीं पर तुम्हारे साथ मेरी कुछ बातें , कुछ सपने अधूरे रह गए वो अब भी बाकी है।

आज आई हो तो बस कह दो कि तुम वो बातें पूरी करने आयी हो जो कभी हमारे दरम्यान अधूरी रह गई थी,
या फिर वो अधूरी चाय के साथ बची सिसकियां पूरी करने आयी हो जो तुमने कभी अधूरा छोड़ा था,
बस एक बार कह दो कि तुम वो अधूरा लूडो का खेल जो पहले कभी हमने साथ खेला था उसे खत्म करने आयी हो,
या वो डायरी पे बनी अधूरी चित्रकारी जो तुम्हारा राह देख रही है उसे पूरा करने आयी हो,
नहीं तो मेरे साथ हाथों में हाथ डालकर एक हो के घूमने आई हो,
बस एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो,
झूठ ही सही बस एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो।


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Feelings, oh feelings!

Because i shifted myself over you,
You hurt me with your careless insults.
They cut through me like a knife,
But blood doesn’t comes out,
So that it cured by expert surgeon.

Like nails were driven into my heart and soul,
So I went to live in the woods,
To make it easier for me to forget
the hurt,
And all the things you have done and said.

You’ve done me wrong by killing myself,
I play the records you’ve engraved into my mind,
Over and over again every day,every hours,every minutes,every seconds,to ever nano……micro……

So I went to live in a world
far away from danger, from harm,
from you and people like you.

Feelings, oh feelings!
Who can escape your presence?
Who can pretend as if you never have to be dealt with?

Who can be so foolish to think,
That one can go on the run,
Without carrying you in the heart,
Until one dares to search,
For the place where you were conceived to hide?


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ऐहसास

मैं लिखता हूँ,
कागज और कलम से प्यार करता हूँ,
भूख – प्यास के साथ तकरार करता हूँ,
हर पल तेरी मौजूदगी का एहसास करता हूँ,
बेरूखी हवाओं में भी तेरी रूह से ऐतवार करता हूँ,
बेमौसम की तनहाई में खुद से बात करता हूँ,
रात – दिन तेरी यादों के साथ फरियाद करता हूँ,
कयामत से पहले तेरे आने का बेसब्री से इंतजार करता हूँ,
इसलिए मुझे अकेला और निकमा मत समझना,
क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।

लिखती हूँ मैं,
तेरे इजहार का इंतजार करती हूँ,
क्यूं जाने तुझमें हर रोज अपनी तलाश करती हूँ,
मिलने का तुमसे दिन – रात आस रखती हूँ,
तस्वीर तेरी अपने पास रखती हूँ,
एक मुस्कान के लिए तेरी में इतनी बार हार सकती हूँ,
तेरी हर बुरी आदत से लगाव रखती हूँ,
इसलिए मुझे अकेली और निक्कमी मत समझना,
क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ।


This is my first post in collaboration with medhachugh. You can access her amazing writing here at medhachugh.


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Theories

An apple amazed Newton,
Gave him a theory.

So be the story,
I wonder what is our story?
Was there a pull that made us fall?
Or did we fall because we were pulled in,
Too fast or too random,
Too fated or mere coincidence.

Staring at an apple,
Red and ripe,
Plucked and ready,
I wonder can a fruit define a theory,
As read in history.

Everything has a theory,
Then searching for our’s,
Were we making history?
Are we theories of love?
Conceived out of a force,
Called gravity;
Or pulled by a romantic delusion,
Termed Destiny.

(If anyone has term to the theory which I’m searching, then please let me know.)


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पर अब, तुमसे प्यार नहीं है

नींद तो अब भी नहीं आती,
भुख तो अब भी नहीं लगती,
दिल और दिमाग की लड़ाई तो अब भी होती है,
पर अब, तुमसे प्यार नहीं है।

तेरे नाम पे आज भी चुप हो जाता हूँ,
आज भी बोलते- बोलते लड़खड़ा जाता हूँ,
कभी- कभी ही सही, पर तुम्हें याद तो आज भी कर लेता हूँ,
पर आज, तुमसे प्यार नहीं है।

आज भी तेरी गलियों से, हूँ मैं गुजरता,
डर आज भी, मुझे है उतना ही लगता,
मुस्कुरा लेता हूं आज भी, तेरी हरकतें याद करके,
पर कसम से, अब तुमसे प्यार नहीं है।

लिखता तो तुम्हें आज भी हूँ,
तेरा जिक्र मेरे सामने आज भी होता है,
तेरे नाम से, आज भी लाली छा जाती है चेहरे पे,
पर कतई , आज तुमसे प्यार नहीं है।

आज भी आईने के सामने सजता हूँ,
हवाओं के अलग होने का आज भी एहसास करता हूँ,
इश्क में आज भी निलाम होता हूँ,
वो भी सरे आम होता हूँ,
पर सच मे, आज तुमसे प्यार नहीं है।

तेरे नाम से मुझे चिढ़ाती आज भी तेरी सहेलियाँ है,
आज भी मेरा सिगरेट और शराब से बैर ही है,
मेरा इश्क आज भी मुफ्त का बाजार ही है,
पर दिल से, अब तुमसे, प्यार नहीं है।


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Again

It seemed again i was to be in relationship,
Again i lost my appetite,
Again i had no care about my time,
Again i started caring for someone,
Again her name swapped away all the expressions from my face,
Again she made a lot of sense for me,
Again she welcomed me to her new world,
Again a new number came to my phone,
Again full night chatting with someone,
Again she gave me a new headache,
Again….again….and….again….she attracted me towards herself.

This time i went for her well armed,
But again she rejected me,
And gave me the address of my failure.

Again there was plan to make me hurted,
Only difference, this time i didn’t get hurt again.


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