Confusion

My mouth wants to speak,
But no sound escapes.
My body wants to move,
But my brain doesn’t listen.
My heart wants to memorize,
But my senses always denied .
Why even my desire refused by myself?
Why am I so broken?
Why is it so hard?

I can’t let you see how vulnerable I’m,
I can’t give an inch,
Or I feel like I’ll lose it all.
Why do i still bother to try?
When I can’t even lift a finger in your direction.

To hold your hand,
To let you know how much I need you, When all I want is for you to hold me,
But I sit in silence,
Silently Frozen.

I’ve forgotten what it’s like to just be in the moment with you,
You see, my heart’s gone cold to preserve what little is left of me.
So I often wonder.
Why do i still love you?
When you’re nothing left except the garbage,
And why do you still love me?
When I’m nothing but broken pieces of who I used to be?


If you have the answer, you’re most welcome in the comment box.


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Theories

An apple amazed Newton,
Gave him a theory.

So be the story,
I wonder what is our story?
Was there a pull that made us fall?
Or did we fall because we were pulled in,
Too fast or too random,
Too fated or mere coincidence.

Staring at an apple,
Red and ripe,
Plucked and ready,
I wonder can a fruit define a theory,
As read in history.

Everything has a theory,
Then searching for our’s,
Were we making history?
Are we theories of love?
Conceived out of a force,
Called gravity;
Or pulled by a romantic delusion,
Termed Destiny.

(If anyone has term to the theory which I’m searching, then please let me know.)


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लेकिन अब भी बाकी है

लिखा है अकेले अबतक , अब तुम्हारे साथ लिखना बाकी है।
लिखे है मैंने पन्ने कई, लेकिन तुम्हारे बारे में लिखना बाकी है।
लिखा है तुम्हारी आँखों के बारे में, लेकिन उसकी नशीली अदाओं के बारे में लिखना बाकी है।
लिखा है तुम्हारे होंठो के बारे में, लेकिन उसकी मदहोशी के बारे में लिखना बाकी है।
लिखा करता हूं तुम्हारी बातो के बारे में, लेकिन तुम्हारे बारे में तो लिखना बाकी है।
लिखे है तुम्हारी खुबसूरती पर, लेकिन उसे खुबसूरती के साथ लिखना बाकी है।
लिखे होंगे तुम पर किस्से कई, लेकिन तुम्हारे बारे मे किस्से लिखना अब भी बाकी है।
तुम्हारे लिए कई मन्नतें मांगी, लेकिन तुम्हें किसी मन्नत मे मांगना अब भी बाकी हैं।
किताबें कई सारी पढी है मेने, लेकिन तुम्हारे चेहरे को पढ़ना अब भी बाकी है।
तुम्हारे लिए बहुत कविताऐं लिखी, लेकिन तुम पर कविता लिखना अब भी बाकी है।।


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सर्कस निर्णय का

जीवन की डोर दूसरो को थामने का अवसर न दें।
अपने जीवन को अपने तरीके से अौर अपने लिए जिये ना कि दूसरो के लिए।

सर्कस और नेशनल पार्क में क्‍या अंतर है! जो दोनों जगह गए हैं, वही असली बात बयां कर सकते हैं। जो नहीं गए, वह दूसरों के अनुभव के आधार पर कहानी कह सकते हैं, लेकिन वन्‍यप्राणियों की मानसिकता, आजादी, व्‍यवहार के बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है।

सर्कस में जानवर प्रशिक्षित हैं। उन्‍हें काम के बदले भोजन मिलता है। इस तरह उनका ‘करियर’ सुरक्षित है।

वहा उन्हें शिकारी से भय नहीं, खतरनाक मनुष्‍यों और जानवरों का डर नहीं। दूसरीे अौर नेशनल पार्क के वन्‍यप्राणी हैं। खतरा, चुनौती हर कदम पर। भोजन के लिए खुद ही जतन करने हैं। इसके बाद भी क्‍या कोई वन्‍यप्राणी इच्‍छा से सर्कस चुनेगा? विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इस बारे में शायद ही असहमति हो कि जीवन का सुख कहां अधिक सुरक्षित है।

जाने-अनजाने हम नेशनल पार्क की आजादी की जगह ‘सर्कस’ वाला जीवन जी रहे हैं। दूसरों के वादे, रहम पर जिंदगी में शांति, सुकून तलाश रहे हैं।

मेरे दोस्त पतंग का मालिक डोर खरीदने वाला नहीं, उड़ाने वाला होता है। इसलिए अपने जीवन की डोर दूसरे को थामने का अवसर न दें। अपनी सोच-समझ से खुद फैसले लीजिए। वह गलत हो सकते हैं, तो होने दीजिए, क्‍योंकि अंत उन्‍हें अपना कहने का सुख तो होगा!

निर्णय लेने की क्षमता दूसरे के पास गिरवी मत रखिए। जीवन की सबसे खूबसूरत चीज का मोल जब तक आप नहीं समझेंगे, हीरे भी चांदी के भाव दूसरों को थमाते रहेगे।

सोचन-समझने की शक्ति, निर्णय लेने की क्षमता प्रकृति का मनुष्‍य को सबसे बड़ा वरदान है। लेकिन यांत्रिक, संवेदनशून्‍य शिक्षा और यथास्थितिवादी समझ ने हमें वैज्ञानिक नजरिए से वंचित कर दिया है।

निर्णय लेने का अधिकार मनुष्‍य होने का सबसे खूबसूरत अहसास है। हम क्‍या हो सकते हैं, इसकी पहली सीढ़ी तो हमारा निर्णय है। लेकिन अक्‍सर हम खास अवसर पर निर्णय लेने से हिचकते ही नहीं, बल्कि भागते रहते हैं।

मिसाल के लिए भारत में बच्‍चे क्‍या पढ़ें, कहां पढ़ें जैसे निर्णय खुद नहीं लेते। शादी, बच्‍चे की परवरिश और करियर जैसे निर्णय के लिए हम दूसरों को फॉलो करते हैं। जिंदगी के सबसे अहम पड़ाव के लिए हमेशा दूसरों की ओर देखते रहते हैं । यह तीन चीजें हमारी सोच, समझ और निर्णय लेने की क्षमता का सबसे सरल, सामान्‍य उदाहरण है।

हममें से कितने लोग हैं, जो इन तीनों के दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हैं! भारत में शादियों के दौरान वर पक्ष का व्‍यवहार अभी भी शालीन, सभ्‍य कहे जाना तो दूर, सामान्‍य के निकट भी नहीं है। क्‍योंकि हमने लड़़के और लड़‍की के बीच अंतर को मन से दूर नहीं किया है। ऐसा भी नहीं कि हम इस दिशा में आगे नहीं बढ़े, लेकिन हमें अभी बहुत दूर जाना है। परिवार में लड़कियों की शिक्षा में तो बाधाएं अब कम आ रही हैं, लेकिन शिक्षा के बाद उनके करियर और शादी के सवाल पर हमारा रवैया ‘सर्कस’ वाला ही है।

हम लड़कियों पर अब भी शासन करने वाले समाज के रूप में ही पहचाने जा रहे हैं। बच्‍चों, महिलाओं के साथ होने वाले व्‍यवहार पर हमारी प्रतिक्रि‍या इसका सबसे प्रबल प्रमाण है।

बच्‍चे क्‍या पढ़ें, कौन सा रास्‍ता चुनें, यह हमारे समाज का सर्कस से प्रेम दिखाने वाला दूसरा काम है। हम बच्‍चों को पालते तो नेशनल पार्क वाली फीलिंग से हैं, लेकिन हमारा आचरण हमेशा सर्कस वाला होता है। हम बच्‍चों पर इस हद तक नियंत्रण चाहते हैं कि यह कामना हमें मनोरोगी बनने की ओर धकेल रही है।

हम चाहते क्या हैं यह हमें भी ठीक से नहीं पता होता है। बच्‍चों में अपनी कामयाबी की खोज, अपनी हसरत पूरी करने की चाह हमें ऐसी ही सनक की ओर ले जाती है। हम निरंतर ऐसा किए जा रहे हैं, क्‍योंकि हमें ऐसा ही करने की ट्रेनिंग मिली है। ऐसा ही करने के लिए हम प्रशिक्षित किए गए हैं।

आखिर में करियर, नौकरी। यहां भी हमारा व्‍यवहार अपने निर्णय खुद करने की जगह दूसरों के हिसाब से चलने वाला है। हम जब तक बादल देखकर मौसम की चाल समझने की कोशिश नहीं करेंगे, रेनकोट बनाने वाली कंपनियां हमें गर्मियों में भी रेनकोट बेचती रहेगी।

मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं है की जो हमारे फैसले लेते है वो हमारे बारे में गलत सोचते हैं, हमारा अहित चाहते हैं। हमें उनकी बातों को बरे ध्यान से सुनना और समछना चाहिए। अौर हमें उसे सलाह के तौर पर लेना चाहिए ना कि आज्ञा के तौर पर।

करियर के मामले में भी सजग और भविष्‍यवादी दृष्टि का विकास होना जरूरी है। सबका सम्‍मान करिए, सबके साथ रहिए, लेकिन हमेशा निर्णय अपना करिए।
अब अपना निर्णय करने का वास्तविक अर्थ यह नही है की आप दूसरों पे विश्वास करना छोर दे, क्योंकि कुछ लोग होते हैं आप के जीवन में जो आप का भला सोचते है परन्तु किसी भी प्रकार से इसका यह मतलब नहीं कि आप अपनी राय, पसंद, समझ का उपयोग करना ही छोड़ दे। क्‍योंकि जीवन एक और सपने अनंत हैं। ‘सर्कस’ में शेर भी रिंग मास्‍टर के हंटर की फटकार पर नाचते हैं। इसलिए, समझिए क‍ि जिंदगी ‘सर्कस’ नहीं है और आप मनुष्‍य हैं ना कि कोई वणप्राणी…


You can share your story when you have to strong for a decision or anything else related to this.
You all are most welcome for sharing your views here!

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.

Meri Aadate

Maine uss gali mai jaana chhod diya
Jis se teri buu aati hai.

Mai ne unn rato se bair krr liya
Jo teri yaad dilati hai.

Maine khud se milna chhod dya,
Kyuki wo tumhara hua krta tha.

Mai ne saaas lena bhi chor diya
Sayad wo hawa tujhe Chuu ke guzri ho.

Maine Sona chor diya,
Taki tere sapne na wapas aaye.

Mai nafrat ke saath rehna sikh gya,
Kuki pyaar teri sakal ki yaad dilata hai.

Maine dosti krna chhod diya,
Taaki fir ehsaas na ho jaye ki tubhi kabhi meri dost thi.


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For this you are most welcome!


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Actually i don’t know!

Do you know the difference between us?

Actually i don’t know!

I told you I loved you but you thought I was lying ,
And you told me how you loved me ,
But I knew you were faking.
Funny how we both loved each,
Without thinking which lie tells the truth, And which truth tells a lie.
For me you are like tear ,
So I would never dare to cry,
As I might lose you!!
But again this time you thought I’m making fun of you.
Can you see the words between my lines?
They are for you and only you.
But again you took it as your complaints.
God knows i always did the best I could do, for you,
I always tried to stand up to your expectations.
Then why do you think I never tried?


( If you have the answer then your words must be in the comment box.
And if you wants to share your any memories which countered your mind while going through this , that memories deserves to be in the comment box.)


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असफल या फिर सफल ?

मोबाइल, फेसबुक और अखबार उन बच्‍चों से भरे हैं, जिन्‍होंने दसवीं/बारहवीं में शानदार प्रदर्शन किया. बधाई ऐसे बच्‍चों के गले का हार बन गई है. मिसाल के लिए हमेशा घर की खिड़की से बाहर झांकते समाज में बच्‍चों की यह कामयाबी जितना उनका भला नहीं करती उससे कहीं अधिक उनका नुकसान करती है.
सफल बच्‍चा उस बच्‍चे से कैसे बेहतर हो सकता है, जो तय समय में रटी/समझी चीजें ठीक से नहीं लिख पाया.
यह समझ पाना बहुत मुश्किल है कि कैसे एक कम नंबर पाने वाले बच्‍चे को उस बच्‍चे से कमज़ोर कहा जा सकता है, जिसके नंबर उस बच्‍चे से अधिक आए हैं. बात केवल भारत की नहीं है, दुनिया के तमाम बड़े देश इस बात की गवाही देते हैं कि वहां के इतिहास, विज्ञान, शोध, राजनीति, कला, सिनेमा में जितना योगदान कम नंबर लाने वालों का है, उतना दूसरे किसी का नहीं है.
नोबल पाने वालों की सूची इस बात का दूसरा सबसे बड़ा प्रमाण है कि बच्‍चे केवल स्‍कूल में फेल होते हैं. समस्‍या स्‍कूल की परीक्षा प्रणाली में है, उन बच्‍चों में नहीं, जो वहां कथित रूप से कमज़ोर घोषित किए जाते हैं. यह पोस्‍ट उनके लिए नहीं है, जिनके नंबर बहुत अच्‍छे आए. उनके लिए तो समाज बाहें फैलाए बैठा है. यह उनके लिए है, जिनकी नजरें, कंधे झुके हैं. जो खुद को हारा, टूटा महसूस कर रहे हैं.

मैंने कही किसी मैगज़ीन में कितनी खूबसूरत बात पढ़ी है,

‘CBSE का रिजल्ट आया. कई लोगों ने टॉप किया और बहुत से बच्चों के आशा से कम नंबर आए. जिनके नंबर कम आए, उम्मीद मुझे उन्हीं से है, क्योंकि पिछले 70 साल में टॉपर्स ने देश के लिए क्या किया, इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता. हां, टॉपर्स ने अपने लिए बहुत कुछ किया, यह मैं बखूबी जानता हूं. इसलिए जिनके कम नंबर आए, उन्हें बहुत बधाई. देश और समाज को उनसे बहुत आशाएं हैं.’

इस बात को थ्‍योरी मत समझिए. न ही इसे ऐसे देखा जाना चाहिए कि अरे इन बातों से कुछ नहीं होता. जिंदगी की दौड़ बड़ी क्रूर है. जानलेवा प्रतिस्‍पर्धा में बच्‍चा कैसे टिकेगा. असल में ऐसा कहते ही हम मनुष्‍य और मनुष्‍यता दोनों पर संदेह के घोड़े दौड़ा देते हैं. दसवीं और बारहवीं की परीक्षा असल में कोई मील का पत्‍थर नहीं है. यह हमारे पुराने, सड़ गल चुके सिस्‍टम की कमी है कि उसे अब तक बच्‍चों की प्रतिभा को सामने लाने का कोई दूसरा तरीका नहीं मिला है.
इसलिए सरकार, समाज और स्‍कूल अपनी पुरानी हो चुकी सोच को बदल नहीं पा रही हैं. हम दुनिया के उन देशों की ओर नहीं देख रहे हैं, जो आज भी बच्‍चे को सात साल के बाद स्‍कूल भेजने के नियम पर कायम हैं. हम उन अमेरिकन कॉलेजों के बारे में आंख-कान बंद किए हैं, जहां सबसे अधिक समय इस बात पर दिया जाता है कि आपकी रुचि क्‍या है. बेकार की चीजों में समय मत लगाइए, खुद को समझिए.
अंग्रेजों को कितना ही कोसते रहिए कि वह आपको क्‍लर्क बना गए. लेकिन उनको गए तो जमाना बीत गया. पीढ़ियां आईं और चली गईं, लेकिन स्‍कूल वैसे ही रहे. शिक्षा की रेल उसी पटरी पर दौड़ी जो अंग्रेज बिछा गए थे. हमने अपने टैगोर की विश्‍व भारती वाला रास्‍ता नहीं चुना. हमने शिक्षा के बारे में गांधी, बुद्ध और आइंस्‍टाइन की बातें नहीं सुनी. हम बच्‍चों को ढांचा बनाने में लग गए.
आप गमलों में पौधे उगाकर पर्यावरण को नहीं बचा सकते. उसके लिए जंगल चाहिए. ठीक इसी तरह नई, वैज्ञानिक सोच-समझ वाले नजरिए वाला देश बड़ों से नहीं बनेगा. उसका बीज बच्‍चों से तैयार होगा. इसलिए बच्‍चों को मार्कशीट के आधार पर तौलना बंद करना होगा. यह अपने ही खिलाफ किया जा रहा सबसे बड़ा अपराध है.
इसलिए, अपने उन बच्‍चों को जो आज नंबर की होड़ में पिछड़कर आत्‍महत्‍या तक को निकल रहे हैं, संभालिए. समझाइए कि स्‍कूल दुनिया से मिलने का रास्‍ता तो दूर, पगडंडी तक नहीं हैं. हमेशा याद रखिए और दूसरों से साझा करिए,

बच्‍चा असफल नहीं होता, असफल स्‍कूल होता है. बच्‍चे हमेशा मंजिल तक पहुंचते हैं, बशर्ते हम उनको बता सकें कि जाना कहां है.’

और यह हमारा और हमारे समाज का ही काम है, बच्‍चों का नहीं.

Image Source : Internet

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imkeshavsawarn |

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It’s not your Fault 

It’s not your fault that I expected,
May be it’s mine that I did.

It’s not your fault that you don’t feel,
May be it’s mine because I cherish every moment with a great zeal.
It’s not your fault that I am disappointed,
May be it’s mine because it was only you that I wanted.

It’s not your fault that I am broken,
May be it’s mine because I am still hoping.

It’s not your fault that you don’t love me,
May be it’s mine that I love you more than I love myself.

It’s not your fault that you want us to be friends, even unknown,
May be it’s mine that I can’t withstand seeing you for more than a days.

It’s not your fault you don’t remember my birthday,
May be it’s mine that I remember every moment spent with you any day.

It’s not your fault that you can go for days without talking to me,
May be it’s mine that I read our entire conversation every time I am lonely.

It’s not your fault that I want to talk you every single day,
May be it’s mine that even taking your name makes me full of energy.

It’s not your fault that you make me happier than I ever thought I could be,
May be it’s mine that you are my everything.

It’s not your fault that you don’t love me,
But this is My happiness to love you.
Yes I love you ❤
Image Source – Internet

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&_Keshav Sawarn |

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As i saw you

As i saw you,
Its seems a adventure is going to happen with me,
Nothing is wrong with you or me,
These feelings are so intense,
That i miss a feeling and i do not even remember.

It’s like being possessed by my own feelings,
That’s not crazy,
That’s human nature,
That you have your own feelings.,
That’s a good thing.
I want to tear down all these walls,
And then ball my eyes out,
It’s heartbreak,
It will pass because,
Fortune favours the brave,
But headache favours the lonely.
Image Source – Internet

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&_Keshav Sawarn |

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Let’s Chat

He:  Hey.
She:  Hi.
He:  Watsup?
She:  Nothing much just chatting. You say?
He:  Okay. Same here.
**Chat Ended**

But actually, he always used to type a lot more than what he used to send.
He:  Hey.
She:  Hi.
He:  Watsup?

She:  Nothing much just Chatting. You say?
He: Oh ! me, I was thinking about you, the way you smile, the way you speak, the way you dress up, oh! this reminds you were looking like a princess not in specific but in all dress and specially when you are smiling but I never had a chance to say that

//Backspace deleted his messages but always failed to delete those feelings.//

**Changes**
He: Same here.
//Waits for some time but as usual no reply//



**Starts typing again**
He: Hey if you are free someday would you like to grab a cup of Coffee?

//Backspace won again//



She:  You were typing something?
He:  Oh yeah but was sending to someone else, sorry wrong chat window. (laughs)
She:  Hehe. Okay.

 
 
///////////////////////////////////////////////
He always believes that a day might come when he will be able to ask her out. Know the deepest secrets of her life. Will become her best friend with whom she can be herself. He will become someone she trusts blindly. To become one of the reasons behind her smile. To be someone to whom she can talk freely without any hesitation, telling things all by her own. A day might come when he will become her ultimate problem solver. The reason to change her last seen to typing. He will become someone who can love her the way no one has ever loved anyone.
A day might come when he will be able to ask her out for Coffee.
But what if this never happens?

What???

…….d….e….a…..t…..h…….????

Image Source – Internet

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&_Keshav Sawarn |
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