सर्कस निर्णय का

जीवन की डोर दूसरो को थामने का अवसर न दें। अपने जीवन को अपने तरीके से अौर अपने लिए जिये ना कि दूसरो के लिए। सर्कस और नेशनल पार्क में क्‍या अंतर है! जो दोनों जगह गए हैं, वही असली बात बयां कर सकते हैं। जो नहीं गए, वह दूसरों के अनुभव के आधार परContinue reading “सर्कस निर्णय का”

असफल या फिर सफल ?

मोबाइल, फेसबुक और अखबार उन बच्‍चों से भरे हैं, जिन्‍होंने दसवीं/बारहवीं में शानदार प्रदर्शन किया. बधाई ऐसे बच्‍चों के गले का हार बन गई है. मिसाल के लिए हमेशा घर की खिड़की से बाहर झांकते समाज में बच्‍चों की यह कामयाबी जितना उनका भला नहीं करती उससे कहीं अधिक उनका नुकसान करती है. सफल बच्‍चाContinue reading “असफल या फिर सफल ?”