तुम हो कौन ?

अगर इश्क़ कोई जुर्म नहीं, फिर ये सजा क्यों।
और है नफरत, तो भारत-पाकिस्तान सा रिश्ता क्यों ।।

अगर दर्द कोई है तेरे दिल में, फिर ये बात क्यों।
और है सुकुन, तो ये अस्पताल क्यों।।

अगर रंज कोई है तेरे सोच में, फिर ये तंज क्यों।
और है गीत , तो ये तीर क्यों।।

अगर हो कोई फूल तुम, फिर इतनी दूर्गन्ध क्यों।
और हो कांटा, तो लैला- मजनू सा इश्क क्यों।।

अगर टूटती – बिखरती सी कोई ख्वाब हो तुम, फिर ये अपनापन वाला राबता क्यों।
और हो हकीकत , तो मैं तनहा क्यों।।

अगर अजनबी सी कोई हो तुम, फिर तुम्हें खोने का डर क्यों।
और हो मेरी, तो ये सौतेलापन क्यों। ।

अगर गुनाह सी कोई हो तुम, फिर तुम्हारे पास होने पे इतना सुकुन क्यों।
और हो इबादत, तो ये घबराहट क्यों।।

अगर परेशानी हो कोई तुम, फिर तुम्हारा इतने बेसब्री से इंतजार क्यों।
और हो मददगार , तो बात- बात पर ये पत्थर क्यों।।

अगर झूठ सी कोई हो तुम , फिर सीने में तुम्हारे होने का एहसास क्यों।
और सच हो, तो तुम हो कौन ?

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तेरे चेहरे की तारीफ़ है!

तेरे चेहरे की क्या तारीफ़ है हर चीज़ इसकी बड़ी बारीक है,
होठों पर बिखरी ये मुस्कान है करतीं ये लाखों का नुकसान है,
नाक के ऊपर कजरारी आँखें है जो सबको उलझाती हैं।

पर जनाब,
ये चेहरा तो सिर्फ नकाब है ये तो मासूमो को फ़साने का जाल है,
कई लोगों को इस चेहरे के न मिलने का मलाल है,
हर कोई इस चेहरे का दीवाना है सभी को इस चेहरे को पाना है।

इस नकाब जैसे चेहरे में बड़ी जादूगरी है धोकेबाज़ी इसमें भरी पड़ी है,
जनाब बच के रहना इस धोकेबाज़ चेहरे से इसमें मासूमियत बड़ी है ,
फिर भी, तेरे चेहरे की क्या तारीफ़ है हर चीज़ इसकी बड़ी बारीक है !!


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क्या मुझसे मिलने आयी हो?

क्या मुझसे मिलने आयी हो? कह दो ना तुम,
एक बार के लिए ही सही,
बस कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो,
सच कहता हूं,
कोई और कारण रोक नहीं पाएगा मुझे,
तुमसे मिलने से,
बस तुम एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो।

सच कहता हूं,
अब मुझे फर्क नहीं पड़ता है कि तुम अकेले आयी हो,
या फिर किसी के साथ आयी हो,
बस कह दो कि मुझसे मिलने आयी हो।

शायद तुम्हें याद नहीं, पर उस दिन कि बातें जो अधूरी रह गई थी हमारे बीच वो अब भी बाकी है,
वो तुम्हारी रखी आधी चाय, उस दिन जो फ़ोन के चक्कर में तुमने छोड़ दी थी वो अब भी बाकी है,
वो तुम्हारा लुडो खेलना मेरे साथ और जीत जाने पर बरी मासुमियत से चिढ़ाना मुझे अब भी बाकी है,
वो मेरे साथ लड़ाई, वो खट्टी-मीठी नोक-झोंक ही सही पर वो सब अब भी बाकी है,
शायद तुम्हें याद नहीं पर वह तुम्हारी टूटी चप्पल सिलने के बाद अभी भी तुम्हारी राह देख रही है,
वो मेरी डायरी पे तुमने जो अधूरी चित्रकारी की थी वो भी पूरा होने के लिए तुम्हारे हाथों से बैचैन हो रही है,
वो उस दिन तुम्हारे साथ जब घूम रहा था तब तुम्हारा हाथ अपने हाथों में डालकर घूमना बाकी रह गया था वो अब भी बाकी है,
तुम्हे याद है कि नहीं पर तुम्हारे साथ मेरी कुछ बातें , कुछ सपने अधूरे रह गए वो अब भी बाकी है।

आज आई हो तो बस कह दो कि तुम वो बातें पूरी करने आयी हो जो कभी हमारे दरम्यान अधूरी रह गई थी,
या फिर वो अधूरी चाय के साथ बची सिसकियां पूरी करने आयी हो जो तुमने कभी अधूरा छोड़ा था,
बस एक बार कह दो कि तुम वो अधूरा लूडो का खेल जो पहले कभी हमने साथ खेला था उसे खत्म करने आयी हो,
या वो डायरी पे बनी अधूरी चित्रकारी जो तुम्हारा राह देख रही है उसे पूरा करने आयी हो,
नहीं तो मेरे साथ हाथों में हाथ डालकर एक हो के घूमने आई हो,
बस एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो,
झूठ ही सही बस एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो।


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ऐहसास

मैं लिखता हूँ,
कागज और कलम से प्यार करता हूँ,
भूख – प्यास के साथ तकरार करता हूँ,
हर पल तेरी मौजूदगी का एहसास करता हूँ,
बेरूखी हवाओं में भी तेरी रूह से ऐतवार करता हूँ,
बेमौसम की तनहाई में खुद से बात करता हूँ,
रात – दिन तेरी यादों के साथ फरियाद करता हूँ,
कयामत से पहले तेरे आने का बेसब्री से इंतजार करता हूँ,
इसलिए मुझे अकेला और निकमा मत समझना,
क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।

लिखती हूँ मैं,
तेरे इजहार का इंतजार करती हूँ,
क्यूं जाने तुझमें हर रोज अपनी तलाश करती हूँ,
मिलने का तुमसे दिन – रात आस रखती हूँ,
तस्वीर तेरी अपने पास रखती हूँ,
एक मुस्कान के लिए तेरी में इतनी बार हार सकती हूँ,
तेरी हर बुरी आदत से लगाव रखती हूँ,
इसलिए मुझे अकेली और निक्कमी मत समझना,
क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ।


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पर अब, तुमसे प्यार नहीं है

नींद तो अब भी नहीं आती,
भुख तो अब भी नहीं लगती,
दिल और दिमाग की लड़ाई तो अब भी होती है,
पर अब, तुमसे प्यार नहीं है।

तेरे नाम पे आज भी चुप हो जाता हूँ,
आज भी बोलते- बोलते लड़खड़ा जाता हूँ,
कभी- कभी ही सही, पर तुम्हें याद तो आज भी कर लेता हूँ,
पर आज, तुमसे प्यार नहीं है।

आज भी तेरी गलियों से, हूँ मैं गुजरता,
डर आज भी, मुझे है उतना ही लगता,
मुस्कुरा लेता हूं आज भी, तेरी हरकतें याद करके,
पर कसम से, अब तुमसे प्यार नहीं है।

लिखता तो तुम्हें आज भी हूँ,
तेरा जिक्र मेरे सामने आज भी होता है,
तेरे नाम से, आज भी लाली छा जाती है चेहरे पे,
पर कतई , आज तुमसे प्यार नहीं है।

आज भी आईने के सामने सजता हूँ,
हवाओं के अलग होने का आज भी एहसास करता हूँ,
इश्क में आज भी निलाम होता हूँ,
वो भी सरे आम होता हूँ,
पर सच मे, आज तुमसे प्यार नहीं है।

तेरे नाम से मुझे चिढ़ाती आज भी तेरी सहेलियाँ है,
आज भी मेरा सिगरेट और शराब से बैर ही है,
मेरा इश्क आज भी मुफ्त का बाजार ही है,
पर दिल से, अब तुमसे, प्यार नहीं है।


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Ishq Ki Beemari

Wo aayi to thi kajal laga ke,
Lekin chli gyi mere dil ko nazar laga ke.
Mil aaya kayi hakim aur pandito se,
Laut aaya doctoro ki dehleej se,
Le li salah kayi sahalakaro se,
Maang li manat raam aur rahim se,
Par ye mun dhoondhta hai abb bhi use hi andhere rasto pe,
Jis ne parchai bankar chlne ka vaada kiya tha.

Naa raat ko nind aati hai,
Naa shaam ko chain milta hai,
Din buss umeedo mai dhal jaata hai,
Phir se to kahi milegi wo nazrili aakhe,
Jo aayi thi kaajal laga ke.


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लेकिन अब भी बाकी है

लिखा है अकेले अबतक , अब तुम्हारे साथ लिखना बाकी है।
लिखे है मैंने पन्ने कई, लेकिन तुम्हारे बारे में लिखना बाकी है।
लिखा है तुम्हारी आँखों के बारे में, लेकिन उसकी नशीली अदाओं के बारे में लिखना बाकी है।
लिखा है तुम्हारे होंठो के बारे में, लेकिन उसकी मदहोशी के बारे में लिखना बाकी है।
लिखा करता हूं तुम्हारी बातो के बारे में, लेकिन तुम्हारे बारे में तो लिखना बाकी है।
लिखे है तुम्हारी खुबसूरती पर, लेकिन उसे खुबसूरती के साथ लिखना बाकी है।
लिखे होंगे तुम पर किस्से कई, लेकिन तुम्हारे बारे मे किस्से लिखना अब भी बाकी है।
तुम्हारे लिए कई मन्नतें मांगी, लेकिन तुम्हें किसी मन्नत मे मांगना अब भी बाकी हैं।
किताबें कई सारी पढी है मेने, लेकिन तुम्हारे चेहरे को पढ़ना अब भी बाकी है।
तुम्हारे लिए बहुत कविताऐं लिखी, लेकिन तुम पर कविता लिखना अब भी बाकी है।।


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Meri Aadate

Maine uss gali mai jaana chhod diya
Jis se teri buu aati hai.

Mai ne unn rato se bair krr liya
Jo teri yaad dilati hai.

Maine khud se milna chhod dya,
Kyuki wo tumhara hua krta tha.

Mai ne saaas lena bhi chor diya
Sayad wo hawa tujhe Chuu ke guzri ho.

Maine Sona chor diya,
Taki tere sapne na wapas aaye.

Mai nafrat ke saath rehna sikh gya,
Kuki pyaar teri sakal ki yaad dilata hai.

Maine dosti krna chhod diya,
Taaki fir ehsaas na ho jaye ki tubhi kabhi meri dost thi.


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Par Aaj

Bachpan mai aksar ek sawal guzar jaya karta tha,
Har 2-4 dino pe, har hafte ya phir mahine,
Par guzar ke jarur jaya karta tha,
Aakhir Bade hoke kya ban na hai??

Kabhi josh sai keh deta tha doctor,
To kabhi Engineer ,pilot , ya phir police,
Jawab hamesha badalta pur tayar rehta tha,
Ki aakhir bade hoke kya ban na hai.

Par aaj sache mayne mai kuch tamanaa jagi hai,
To khud pe hasi aa rahi hai,
Kuki mujhe bade hoke ab phir sai bacha ban na hai……..

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&_Keshav Sawarn |

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Dar lagta hai

Nazdikiya itni hai ki, duriyo se dar lagta hai,

Ankho me ghehraiya itni hai , Ki doobne ka man karta hai,

Bahe failaye khade hai , kisi k aagman k liye, ye dil beshbar lgta hai,

Wo aati hii hogi , bs koi rasta na rok le, isi baat ka dar lgta hai,

Uski addao se nahi , uske masoomiyat se dar lagta hai,

Intazaar to bahoto ko hai uska ,magar beshabar ye dil hi lgta hai,

Chalo intazaar thora aur hi sahi,

Aaj nahi to kal, kal nahi to parso , parso nahi to barso,

Muh chupa kar hi sahi , magar ana to padega use jarur,

Khone ka to dar hi nahi ab use , panne me dar lagta hai.

Image Source : Internet

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