चलो तो सही

“चलो तो सही” – RhYmOpeDia

चलो तुम्हारी आँखों में अपना शहर बसाते हैं,
चलो तुम्हारी हसीं से अपना जहाँ रोशन करते हैं,
चलो तुम्हारी आवाज़ को अपना संगीत बनाते हैं,
चलो तुम्हारी चाल को अपनी चाल बनाते हैं,
चलो तुम्हारे हाथों को थाम कर दूर तक का सफर करते हैं,
चलो तुम्हारे बातों के साथ सुबह-शाम करते हैं,
चलो तुम्हारे खामोशियों से बात करते हैं,
चलो तुम्हारे मासूमियत से इश्क फरमाते हैं,
चलो तुम्हारे खुशबू को इत्र बना इस्तेमाल करते हैं
चलो तुम्हारे झलक के साथ रोज़ा खत्म करते हैं,
चलो तुम्हारे साथ होली-‌ दीवाली मनाते हैं,
चलो तुम्हें अपनी ज़िन्दगी बनाते हैं,
चलो तो सही तुम्हारे साथ जिंदगी बिताते हैं।

तुम दूर तक साथ तो चलोगी ना?
मुझे गिरते हुए सम्हाल तो लोगी ना?
मेरा साथ तो दोगी ना?
मेरे गलतियों को थोड़ा माफ़ तो कर दोगी ना?
तुम खुद से रूबरू होने दोगी ना?
मुझे अपना जिंदगी तो बनाओगी ना?
तो फिर चलो हम साथ जिंदगी बिताते है।


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तुम पुछते हो

“तुम पुछते हो” – RhYmOpeDia

तुम पुछते हो, मुझे उसमें क्या पसंद है?
उसकी बातें पसंद हैं
उसकी शरारतें पसंद हैं
उसकी हल्की भूरी आँखें
उसके होंठों के निचे तिल
और उसकी मुस्कान पसंद है।
उसकी दोस्ती पसंद है
उसकी आवाज पसंद है
उसकी रंगीन शख़्सियत
उसकी हर एक छोटी से छोटी अदाएं
उसका कातिलाना अंदाज पसंद है।
और तुम पुछते हो, मुझे उसमें क्या पसंद है।

तुम पुछते हो, मुझे उससे क्यों प्यार है?
तो मेरी मोहब्बत का राज़ तुम
उन हवाओं से पूछो जो आज उसे छूने के बाद बावरी हो गई,
उन वादियों की खुबसूरती से पूछो जो उसके सामने पल भर टीक न पाई,
उन बारिश के बूंदों से पूछो जो उससे रूबरू होने इतनी दूरी तय कर धरती पर आई,
उन फूलों से पूछो जो उससे मिलने से पहले अपने खुशबू पर इतराया करती थी,
उन पक्षियों से पूछो जो कभी अपने मधुर आवाज को लेकर जानी जाती थी,
और तुम पुछते हो, मुझे उससे प्यार क्यों है।

तुम पुछते हो, मुझे वो इतनी खास क्यों है?
तो क्या कभी आसमान से पूछा है कि वह नीला क्यों है?
क्या कभी सुरज से पूछा है कि वह इतना ज्वलनशील क्यों है?
क्या कभी चांद से पूछा है कि वह खुबसूरत क्यों है?
क्या कभी धरती से पूछा है कि वह गोल क्यों है?
क्या कभी खुशबू से पूछा है कि वह खुशनुमा क्यों है?
क्या कभी दिन से पूछा है कि वह रात के बाद क्यों है?
क्या कभी कश्मीर से पूछा है कि वह स्वर्ग क्यों है?
और तुम पुछते हो, मुझे वो इतनी खास क्यों है।

तुम पुछते हो, मुझे वह कैसी पसंद है?
हंसते- खिलखिलाते पसंद है
मंद-मंद मुस्कुराते पसंद है
कभी-कभार गुस्साते पसंद है
जल्दी-जल्दी बोलते पसंद है
आदाब में हिचक पसंद है
चेहरे पर हया पसंद है
नखरो के संग अभियान करते पसंद है
आंखों से बात जाहिर करते पसंद है
वह जैसी है वैसी ही पसंद है
वह मुझको काले कमीज़ में बेहद पसंद है
और तुम पुछते हो, मुझे वह कैसी पसंद है।


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सच्चाई

आज फिर मैंने उसे पिटते देखा था,
मदद की उम्मीद में नजरों को दौड़ाते देखा था,
दर्द से डूबी आवाज को कड़ाहते देखा था,
पंद्रह- बीस हट्टे – कठ्ठे नौजवानों को लाचार सा दर्शक बनते देखा था,
किसी बलशाली को अपना बाहुबल किसी लाचार पर बरसाते देखा था,
और उसी सड़क के किनारे से उस पल मैं भी गुजर रहा था,
सोचा भी था कि जाके उसकी मदद करू,
जा के पुछू् कि क्यूं मार रहे हो भाई….. आखिर इसकी ग़लती क्या है?
गलती कुछ भी हो पर इसे इस पीड़ा से जरूर बचाऊंगा,
ऐसा ही मैंने सोचा था,
उन काफिड़ो कि भीड़ में हीरो बनने का सुनहरा मौका था,
एक सुंदर सी कहानी का जादूई पात्र बनने का मौका था,
जिसकी कहानी में सब बच्चों को सुनाता,
पर न जाने क्यों मेरे पैर ने मानो मेरे सोच से बैर कर लिया हो,
दिल चिल्ला रहा था मदद करो,
पर दिमाग ने बोला तेरा क्या जाता है आगे बढ़ो,
एक बार फिर दिल और दिमाग की लड़ाई में दिल हार गया,
उसे यूं ही पिटते उसकी हालत पर छोड़ मैं आगे बढ़ आया,
दिल से एक आवाज आयी – भाई उन काफिड़ो कि फौज में स्वागत है तुम्हारा,
इसे सुनते ही फिर पूछा दिमाग से – कही मेरे मदद की ही तो जरूरत नहीं थी उसे?
और जवाब आया – कोई और मदद कर देगा,
तेरा कौन है भाई?
इतने देर में मैं तो उसे उसकी हालत पर छोड़ आगे बढ़ गया था,
और इसी तरह मैंने आज उसे फिर पिटते देखा।


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आज कुछ अलग-सा लिख रहा हूं

आज कुछ अलग-सा लिख रहा हूं,
बस उसे सोच कर शब्दों को जोड़ रहा हूं,
वो लम्हे, वो बिताए हुए पलों को
बड़ी खुबसुरती से कैद कर सजा रहा हूं।

आज कुछ हसीन-सा लिख रहा हूं,
बात पहली मुलाकात की कर रहा हूं,
वो नैनों की लड़ाई, और बात-बात पर झगड़ना
और फिर प्यार से मनाना लिख रहा हूं।
आज कुछ अलग-सा लिख रहा हूं,
बात थोड़े इजहार की लिख रहा हूं,
बात थोड़े तेरे-मेरे साथ की लिख रहा हूं,
वो यादें, वो बेवजह कई वक़्त तक
साथ बैठ जानें की लिख रहा हूं,
वो वादे, वो कसमें सब याद कर
तेरे बातों को लिख रहा हूं,
आज कुछ मदहोशी-सा लिख रहा हूं।

मुलाकात, इजहार, इकरार सब लिख दिया
कलम ने मेरे,
आगे भी लिखना चाहता था पर
ये थम-सा गया बेचारा,
बात,
बात शायद बेवफाई की ये लिख ना पाया,
आज वही अधूरा-सा मुलाकात लिख रहा हूं,

आज उन्हीं ख़्वाबों को लिख रहा हूं,
जिसे लिखने से मेरा कलम भी डरता है,
और मालूम नहीं क्यूं पर ये हाथ भी लिखने वक़्त रूक-सा जाता है,
जिसे सोचकर मेरा रूह आज भी थड़ा-सा जाता है,
शायद आज भी जिसे ये पागल-सा दिल कुबुल नहीं कर पाया है,
आज उन्हीं टूटे हुए अरमानों को लिख रहा हूं,
आज फिर अपना अधूरा ख्यालात लिख रहा हूं…


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याद तो है ना

प्यार से थोड़ा कम ही सही,
पर प्यार तो है ना।
दोस्त से थोड़ा ज्यादा मानता हूं तुम्हें,
कुछ बात तो है ना।
तुझे, कुछ पता नहीं,
पर तेरी हर बात मुझे याद तो है ना।
मैं सुखा हुआ जमीन की तरह हूं, मानता हूं
तु उसको भींगोने वाली बरसात तो है ना,
तु उसको भींगोने वाली बरसात तो है ना।।

अब तो ये दिल किसी का होता भी तो नहीं है,
किसी और के ख्वाब में सोता भी तो नहीं है,
तेरी ही बातों में उलझा-सा रहता है,
मेरी तो अब सुनता भी नहीं है,
रख लो ना, तुम इसे अपने पास
मेरे पास तो धड़कता भी नहीं है
क्या करूं मैं इसका, तुम्हीं बताओ ना
इस उल्लू को तुम्हीं समझाओं ना, तुम्हारे सिवा किसी
और की बातों को समझता भी तो नहीं है।
माना की नादान है,
पर तेरे लिए ही तो परेशान हैं,
तेरा ही तो आशिक है ये,
पर तू इसकी जान तो है ना,
तू इसकी जान तो है ना।

माना देखा नहीं मैं ने कभी तुझे उतनी सिद्दत से,
पर तेरी मुस्कान कितनी खूबसूरत है,
मुझे पता तो है ना।
माना मैं कभी डूबा नहीं
तुम्हारी आंखों की गहराई में
पर उसकी क़ातिलाना अदाओ के बारे में एहसास तो है ना।
अच्छा एक बात बताओ
क्यूं तड़पाती हो इतना मुझे,
अच्छा लगता है?
बताओ ना, क्या तुम्हें अच्छा लगता है?
तुम्हारे लिए ही तो लिखता रहता हूं,
तुमने पढ़ा तो है ना।
जिस तरह मैं सोचता हूं तुम्हें,
तुमने कभी सोचा तो है ना,
सोचा तो है ना।।

तेरा केशव बनना है मुझे,
मेरी राधा बनोगी तुम ना।
एक दिल ही तो है जिसका आधा हूं मैं
बाकी आधा बनोगी तुम ना।
अब बता भी दो
तुम्हें प्यार तो है ना?
तेरा ही तो हूं मैं
ये बात तुम्हें याद तो है ना,
याद तो है ना।।


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imkeshavsawarn |Manish Kumar

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तुम हो कौन ?

अगर इश्क़ कोई जुर्म नहीं, फिर ये सजा क्यों।
और है नफरत, तो भारत-पाकिस्तान सा रिश्ता क्यों ।।

अगर दर्द कोई है तेरे दिल में, फिर ये बात क्यों।
और है सुकुन, तो ये अस्पताल क्यों।।

अगर रंज कोई है तेरे सोच में, फिर ये तंज क्यों।
और है गीत , तो ये तीर क्यों।।

अगर हो कोई फूल तुम, फिर इतनी दूर्गन्ध क्यों।
और हो कांटा, तो लैला- मजनू सा इश्क क्यों।।

अगर टूटती – बिखरती सी कोई ख्वाब हो तुम, फिर ये अपनापन वाला राबता क्यों।
और हो हकीकत , तो मैं तनहा क्यों।।

अगर अजनबी सी कोई हो तुम, फिर तुम्हें खोने का डर क्यों।
और हो मेरी, तो ये सौतेलापन क्यों। ।

अगर गुनाह सी कोई हो तुम, फिर तुम्हारे पास होने पे इतना सुकुन क्यों।
और हो इबादत, तो ये घबराहट क्यों।।

अगर परेशानी हो कोई तुम, फिर तुम्हारा इतने बेसब्री से इंतजार क्यों।
और हो मददगार , तो बात- बात पर ये पत्थर क्यों।।

अगर झूठ सी कोई हो तुम , फिर सीने में तुम्हारे होने का एहसास क्यों।
और सच हो, तो तुम हो कौन ?

Continue reading तुम हो कौन ?

तेरे चेहरे की तारीफ़ है!

तेरे चेहरे की क्या तारीफ़ है हर चीज़ इसकी बड़ी बारीक है,
होठों पर बिखरी ये मुस्कान है करतीं ये लाखों का नुकसान है,
नाक के ऊपर कजरारी आँखें है जो सबको उलझाती हैं।

पर जनाब,
ये चेहरा तो सिर्फ नकाब है ये तो मासूमो को फ़साने का जाल है,
कई लोगों को इस चेहरे के न मिलने का मलाल है,
हर कोई इस चेहरे का दीवाना है सभी को इस चेहरे को पाना है।

इस नकाब जैसे चेहरे में बड़ी जादूगरी है धोकेबाज़ी इसमें भरी पड़ी है,
जनाब बच के रहना इस धोकेबाज़ चेहरे से इसमें मासूमियत बड़ी है ,
फिर भी, तेरे चेहरे की क्या तारीफ़ है हर चीज़ इसकी बड़ी बारीक है !!


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क्या मुझसे मिलने आयी हो?

क्या मुझसे मिलने आयी हो? कह दो ना तुम,
एक बार के लिए ही सही,
बस कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो,
सच कहता हूं,
कोई और कारण रोक नहीं पाएगा मुझे,
तुमसे मिलने से,
बस तुम एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो।

सच कहता हूं,
अब मुझे फर्क नहीं पड़ता है कि तुम अकेले आयी हो,
या फिर किसी के साथ आयी हो,
बस कह दो कि मुझसे मिलने आयी हो।

शायद तुम्हें याद नहीं, पर उस दिन कि बातें जो अधूरी रह गई थी हमारे बीच वो अब भी बाकी है,
वो तुम्हारी रखी आधी चाय, उस दिन जो फ़ोन के चक्कर में तुमने छोड़ दी थी वो अब भी बाकी है,
वो तुम्हारा लुडो खेलना मेरे साथ और जीत जाने पर बरी मासुमियत से चिढ़ाना मुझे अब भी बाकी है,
वो मेरे साथ लड़ाई, वो खट्टी-मीठी नोक-झोंक ही सही पर वो सब अब भी बाकी है,
शायद तुम्हें याद नहीं पर वह तुम्हारी टूटी चप्पल सिलने के बाद अभी भी तुम्हारी राह देख रही है,
वो मेरी डायरी पे तुमने जो अधूरी चित्रकारी की थी वो भी पूरा होने के लिए तुम्हारे हाथों से बैचैन हो रही है,
वो उस दिन तुम्हारे साथ जब घूम रहा था तब तुम्हारा हाथ अपने हाथों में डालकर घूमना बाकी रह गया था वो अब भी बाकी है,
तुम्हे याद है कि नहीं पर तुम्हारे साथ मेरी कुछ बातें , कुछ सपने अधूरे रह गए वो अब भी बाकी है।

आज आई हो तो बस कह दो कि तुम वो बातें पूरी करने आयी हो जो कभी हमारे दरम्यान अधूरी रह गई थी,
या फिर वो अधूरी चाय के साथ बची सिसकियां पूरी करने आयी हो जो तुमने कभी अधूरा छोड़ा था,
बस एक बार कह दो कि तुम वो अधूरा लूडो का खेल जो पहले कभी हमने साथ खेला था उसे खत्म करने आयी हो,
या वो डायरी पे बनी अधूरी चित्रकारी जो तुम्हारा राह देख रही है उसे पूरा करने आयी हो,
नहीं तो मेरे साथ हाथों में हाथ डालकर एक हो के घूमने आई हो,
बस एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो,
झूठ ही सही बस एक बार कह दो कि तुम मुझसे मिलने आयी हो।


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ऐहसास

मैं लिखता हूँ,
कागज और कलम से प्यार करता हूँ,
भूख – प्यास के साथ तकरार करता हूँ,
हर पल तेरी मौजूदगी का एहसास करता हूँ,
बेरूखी हवाओं में भी तेरी रूह से ऐतवार करता हूँ,
बेमौसम की तनहाई में खुद से बात करता हूँ,
रात – दिन तेरी यादों के साथ फरियाद करता हूँ,
कयामत से पहले तेरे आने का बेसब्री से इंतजार करता हूँ,
इसलिए मुझे अकेला और निकमा मत समझना,
क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।

लिखती हूँ मैं,
तेरे इजहार का इंतजार करती हूँ,
क्यूं जाने तुझमें हर रोज अपनी तलाश करती हूँ,
मिलने का तुमसे दिन – रात आस रखती हूँ,
तस्वीर तेरी अपने पास रखती हूँ,
एक मुस्कान के लिए तेरी में इतनी बार हार सकती हूँ,
तेरी हर बुरी आदत से लगाव रखती हूँ,
इसलिए मुझे अकेली और निक्कमी मत समझना,
क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ।


This is my first post in collaboration with medhachugh. You can access her amazing writing here at medhachugh.


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पर अब, तुमसे प्यार नहीं है

नींद तो अब भी नहीं आती,
भुख तो अब भी नहीं लगती,
दिल और दिमाग की लड़ाई तो अब भी होती है,
पर अब, तुमसे प्यार नहीं है।

तेरे नाम पे आज भी चुप हो जाता हूँ,
आज भी बोलते- बोलते लड़खड़ा जाता हूँ,
कभी- कभी ही सही, पर तुम्हें याद तो आज भी कर लेता हूँ,
पर आज, तुमसे प्यार नहीं है।

आज भी तेरी गलियों से, हूँ मैं गुजरता,
डर आज भी, मुझे है उतना ही लगता,
मुस्कुरा लेता हूं आज भी, तेरी हरकतें याद करके,
पर कसम से, अब तुमसे प्यार नहीं है।

लिखता तो तुम्हें आज भी हूँ,
तेरा जिक्र मेरे सामने आज भी होता है,
तेरे नाम से, आज भी लाली छा जाती है चेहरे पे,
पर कतई , आज तुमसे प्यार नहीं है।

आज भी आईने के सामने सजता हूँ,
हवाओं के अलग होने का आज भी एहसास करता हूँ,
इश्क में आज भी निलाम होता हूँ,
वो भी सरे आम होता हूँ,
पर सच मे, आज तुमसे प्यार नहीं है।

तेरे नाम से मुझे चिढ़ाती आज भी तेरी सहेलियाँ है,
आज भी मेरा सिगरेट और शराब से बैर ही है,
मेरा इश्क आज भी मुफ्त का बाजार ही है,
पर दिल से, अब तुमसे, प्यार नहीं है।


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imkeshavsawarn | aBHi |
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Ishq Ki Beemari

Wo aayi to thi kajal laga ke,
Lekin chli gyi mere dil ko nazar laga ke.
Mil aaya kayi hakim aur pandito se,
Laut aaya doctoro ki dehleej se,
Le li salah kayi sahalakaro se,
Maang li manat raam aur rahim se,
Par ye mun dhoondhta hai abb bhi use hi andhere rasto pe,
Jis ne parchai bankar chlne ka vaada kiya tha.

Naa raat ko nind aati hai,
Naa shaam ko chain milta hai,
Din buss umeedo mai dhal jaata hai,
Phir se to kahi milegi wo nazrili aakhe,
Jo aayi thi kaajal laga ke.


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लेकिन अब भी बाकी है

लिखा है अकेले अबतक , अब तुम्हारे साथ लिखना बाकी है।
लिखे है मैंने पन्ने कई, लेकिन तुम्हारे बारे में लिखना बाकी है।
लिखा है तुम्हारी आँखों के बारे में, लेकिन उसकी नशीली अदाओं के बारे में लिखना बाकी है।
लिखा है तुम्हारे होंठो के बारे में, लेकिन उसकी मदहोशी के बारे में लिखना बाकी है।
लिखा करता हूं तुम्हारी बातो के बारे में, लेकिन तुम्हारे बारे में तो लिखना बाकी है।
लिखे है तुम्हारी खुबसूरती पर, लेकिन उसे खुबसूरती के साथ लिखना बाकी है।
लिखे होंगे तुम पर किस्से कई, लेकिन तुम्हारे बारे मे किस्से लिखना अब भी बाकी है।
तुम्हारे लिए कई मन्नतें मांगी, लेकिन तुम्हें किसी मन्नत मे मांगना अब भी बाकी हैं।
किताबें कई सारी पढी है मेने, लेकिन तुम्हारे चेहरे को पढ़ना अब भी बाकी है।
तुम्हारे लिए बहुत कविताऐं लिखी, लेकिन तुम पर कविता लिखना अब भी बाकी है।।


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imkeshavsawarn |
heena chugh ( CHEERFUL SPARKLE)

© 2018 RhYmOpeDia


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Meri Aadate

Maine uss gali mai jaana chhod diya
Jis se teri buu aati hai.

Mai ne unn rato se bair krr liya
Jo teri yaad dilati hai.

Maine khud se milna chhod dya,
Kyuki wo tumhara hua krta tha.

Mai ne saaas lena bhi chor diya
Sayad wo hawa tujhe Chuu ke guzri ho.

Maine Sona chor diya,
Taki tere sapne na wapas aaye.

Mai nafrat ke saath rehna sikh gya,
Kuki pyaar teri sakal ki yaad dilata hai.

Maine dosti krna chhod diya,
Taaki fir ehsaas na ho jaye ki tubhi kabhi meri dost thi.


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This poem , ‘ Meri Aadate ‘ is under copyright of RhYmOpeDia.


Team Work of:

imkeshavsawarn | Abhi tThe god |
Heena Chugh (CHEERFUL SPARKLE) |

© 2018 RhYmOpeDia


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Par Aaj

Bachpan mai aksar ek sawal guzar jaya karta tha,
Har 2-4 dino pe, har hafte ya phir mahine,
Par guzar ke jarur jaya karta tha,
Aakhir Bade hoke kya ban na hai??

Kabhi josh sai keh deta tha doctor,
To kabhi Engineer ,pilot , ya phir police,
Jawab hamesha badalta pur tayar rehta tha,
Ki aakhir bade hoke kya ban na hai.

Par aaj sache mayne mai kuch tamanaa jagi hai,
To khud pe hasi aa rahi hai,
Kuki mujhe bade hoke ab phir sai bacha ban na hai……..

This poem, ‘Par Aaj‘ is under copyright of RhYmOpeDia.

&_Keshav Sawarn |

© 2018 RhYmOpeDia

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Dar lagta hai

Nazdikiya itni hai ki, duriyo se dar lagta hai,

Ankho me ghehraiya itni hai , Ki doobne ka man karta hai,

Bahe failaye khade hai , kisi k aagman k liye, ye dil beshbar lgta hai,

Wo aati hii hogi , bs koi rasta na rok le, isi baat ka dar lgta hai,

Uski addao se nahi , uske masoomiyat se dar lagta hai,

Intazaar to bahoto ko hai uska ,magar beshabar ye dil hi lgta hai,

Chalo intazaar thora aur hi sahi,

Aaj nahi to kal, kal nahi to parso , parso nahi to barso,

Muh chupa kar hi sahi , magar ana to padega use jarur,

Khone ka to dar hi nahi ab use , panne me dar lagta hai.

Image Source : Internet

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imkeshavsawarn |

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Maana ki wo meri Chahat thi

Maana ki wo meri chahat thi,
Par wo anjani thi…..

Arr anjano se hum pyar krte hai,
Katai ishq nahi.

Maana ki wo meri chahat thi,
Par wo anjani thi….

Anjane aate hai arr chale jaate hai,
Buss khwab si hakikat chor jaate hai.

Maana ki wo meri chahat thi,
Par wo anjani thi……

Dil mai uffan jug jati hai,
Fir khayal ata hai ki wo anjani thi.

Maana ki wo meri chahat thi,
Par wo anjannni thi……

Munn mai salinta si chaati hai,
Pur anjnabi khwab neend le jaati hai.

Maana ki wo meri chahat yhi,
Par wo anjanni thi…..

Wo deti hai aksar dastak mere armano pe,
Par kya kre….wo anjaani thi,
Maana ki wo meri chhahat thi.

Image Source : Internet

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SAB SAPNA SA LAGTA HAI

Tanhai bhi kabhi apna sa lagta hai,
Muskura ke dekho to wo bhi sapna sa lagta hai.

Aankh band hote hi bahot apne dekhe hai,
Par aankh khol ke apna milna sapna sa lagta hai.

Sapne mai to kai dhundhle chehre nazar aate hai,
Par ab apna chehra bhi sapna sa lagta hai.

Lal-gulabi-hra-nila kuch keh jaya kati hai,
Par ab kisi se kuch sunn na bhi sapna sa lagta hai.

Band aankho se to kai sapne dekhe hai,
Par khuli aankho se ab sab sapna sa lagta hai .

Mil-jul liya bahot anzano se,
Par abb khud se milna bhi sapna sa lagta hai….
Par ab khud se milna bhi sapna sa lagta hai….

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Mai baat tumhari karta hu

Mai baat tumhari karta hu,
Sab kehte hai sayari katrta hu.

Pehle to sirf dekha aur socha karta tha,
Par na jane ku abb sapne mai bhi tum se baate karta hu,
Mai baat tumhari…………
Sab kehte hai………………

Mai aksar kuch apni jeb mai rakh ke tumhare pass aata hu,
Par na jane kuu bin kuch bole wapas chala jata hu,
Mai baat tumhari……………
Sab kehte hai…………………

Tum hame bhula di to koi nai baat nahi,
Lekin yaad rakhna jis din humne tumhe bhula diya uss din duniya mai sachi jajbaat nahi,
Mai baat tumhari…………..
Sab kehte hai………………..

Jis mor pe aakar tum hasti ho,

Uss mor ka aakhiri ghar mera hai,

Kabhi fursat ho to aakar ke,

Ek kupp chai to pii jana,

Arr saath mai yaade le jana,

Mai baat tumhari…………..

Sab kehte hai……………….

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1mai1

This poem i loves to dedicate my loveliest friend ch……and my Bhabhiiji(Lady Don). actually mai ne un dono ke lye likhi hi hai….just enjoy dear
……….@……….@………..@………..@…………..

Kuch pyar hote hai jo dur se hi ho jate hai,
Kuch pyar hote hai jo pass ho ke bhi kho jate hai.

Ye dunya aksar aasiko ke janaje mai jati hai,
Par kuch hote hai duniya ke lye misal ban jate hai.

Hai uske bhi kai rup aur rang,
Par dil uska sacha hai,
Mana ki nahi hai coolest in look,
Par dil se hai pura purest tumhare liye hai by hook or by crook.

Aksar lok chand-taro aur jannat ki baate kiya karte hai,

Par tum dono ka sath har ek pal hi janat hai.

 Tum uske sath de ke to dekho,

Oo duniya se lar jayenge,
Sach kehta hu aag nahi lagunga duniya mai,
Aag oo duniya ko laga jayenge.

Khone ko to kuch nahi tha,
Phir bhi kho dali hai apni nind aur pyaas,
Jine ko bahot bahane the uske pass,
Par aaj tum se behtar kuch na hai uske pass.

Kehne ko to milan hota hai do jismo ja,
Par tumlogo ne kuch alag kar dalne ka soch dali hai,
Kurukshetra ja ke tumko likhni nai kahani hai.

Ab tarif karui kuch Bhabhiji (N….) ki,
Karore mai nahi wah 1mai1 hai mere dost ke lye,
Kuki carore mai 1to aksar dundh lye jate hai.

Ab mai bhi kuch bolu,
Yaad jarur karna apni shaadi mai dear😘😍…
Koi nahi agar aaj aap sath nahi har ek pal hai,
Aksar mere dost mushkilo mai hi misale likhi jati hai.

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&_Keshav Sawarn |

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Khayalat

Kuch kehte hai pyar aapko andha bana deta hai,
Kuch to pyar ko hi andha bana dete hai,
Par kya bolu unse jo pyar mai bhi dekhna chahte hai.

Kuch ankho mai khote hai,
Kuch bato mai khote hai,
Pur apni duniya kuch alag hai,
Hum to har ek saas mai khote hai.

Kuch pass hoke bhi dur hote hai,
Kuch dur hoke bhi pass hote hai,
Par apni kahani sab se alag hai,
Tanhaiyo me bhi apke khaylo me apne pan sa lgta hai.

Kuch jayda emotions wale hote hai,
Kuch kam emotions wale hote hai,
Par kya bolu apne bare mai,
Emotions bhi unki dastak dete hi mom ki tarah pighal jate hai.

Kuch ehsaso ko tabazzo dete hai,
Kuch khayalo ko tabazzo dete hai,
Kuch to apne dimag ki bhi sun lete hai,
Kae to dil ki sun te hai,
Par hum to unki har ek ruh ki aawaz ko sun lete hai.

Kuch apne ehsaaas bol ke baya karte hai,
Kuch gaa ke to wahi kuch naach ke,
Par hum to aaj bhi sabdo ke sath khel ke baya karte hai.

Kuch manjil ke liye raah dundh lete hai,
Kae to raah ko hi manjil bana lete hai,
Hum bhi nikle the usi raah par,
Par kya kare raah ne hi hume apni manzzil chun li.

Kae to sadko pe milte hai,
Kae raah me milte hai ,
Par apni mulakat hui thi saaso ke ek mod pe,
Aur uss roz se hum aap ke har ek saaso ko pehcante hai.

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&_Keshav Sawarn |

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ThErAuPtIc…LoVe-VIII


But regardless of how quickly you left,

 or how much time we spent together,

 or whether your leaving was bad enough to be considered ‘heartbreak,’

 I’m glad you taught me what love isn’t. 

Because it helped me finding the love ,

which I expecting from you. 

Even though it hurt, but your leaving must

 led me again to the deadliest person .

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&_Keshav Sawarn | 

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ThErAuPtIc…LoVe-V

I barely even knew you,
so you really shouldn’t matter.
I shouldn’t do a double-take every time someone who looks like you sits across from me on the metro.
I shouldn’t be worrying about what will happen if I run into you when I visit a part of the colony I know you frequent.
Your existence shouldn’t concern me,
but for some reason I just really don’t like being reminded that you and I were once a thing.
Is it the right part for me or not,
Just confused……..!!!

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&_Keshav Sawarn |

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जरिया किताबो का 

ढूंड तो में तुम्हे रहा था,
बस जरिया कितबो का था।।

 
हम तो सोशल मीडिया इस्तेमाल किया करते थे,
पर आज बैठ कर यादे लिखे जा रहे है।।

जब मालूम ही था की तुम आखरी पन्ने में हो,
फिर भी हर पन्ना किसी उम्मीद में बदले जा रहे थे।।

में ने तो किताब की कवर को ही देख किताब पढ़ डाली,
पर तुम तो सच में अनपढ़ बनकर किताब को कबार समझ रद्दी में बेच डाली।।

मालूम है की में वो नहीं हूँ जिसे तुम चाहती हो,
हम तो वो रकीब है जो महफिलो में घर धुन्ध्ते है।।

हम तो हमेशा तुम्हे देख के ही नशे में रहा करते थे,
पर कमबख्त आज पूरी बोतल पि ली फिर भी होश में है।।

This poem, ‘जरिया कितबो का’ is under copyright of LoOsEaCtIoN.
&_Keshav Sawarn| ©2017LoOsEaCtIoN

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    वक्त को वक्त भी नहीं

    वक्त को वक्त भी नहीं,
    फिर भी नज़रें तुम्हें ही तलाशती है…
    ये सोचना ग़लत है_
    कि तुम पर नज़र नहीं है।
    मसरूफ़ हम बहुत है
    मगर बे-ख़बर नहीं है ।।

    बत्तमीज़ तुम इसलिए नही हुई क्योंकि
    किसी और पे सवाल हुआ
    सवाल वो तुम सह न सकी जो
    तुम पे बार बार हुआ।।

    तुम ज़िन्दगी नहीँ हो मेरी?
    तुम सी सरल होती काश!
    पेचीदा है ये ज़िन्दगी,
    इसीलिये ज़िन्दगी नहीं तुम
    तुम तो बिल्कुल सरल, हवाओ की तरह
    तुम तो बस मेरी सुकून वाली साँस हो।।

    बस अल्फाज़ो की ही कमी है तेरे मेरे दरमियाँ,
    कुछ ना हो के भी, सब कुछ है, तेरे मेरे दरमियाँ,
    मेरी लकीरो में, तू है या नहीं, मेरी तकदीर की इम्तिहान, कुछ इस तरह से है।।

    ख्वाइशें अधूरी हैं,क्योंकि मज़बुरी है
    मजबूरियां तुम्हारी,हमको सारी,
    सारी की सारी समझ आ गई
    पर क्या तुम्हें हमारी
    तुमको आसानी से समझ जाने की ये आदत
    पसंद आ गयी ?

    बस एक चाहत थी तेरे साथ जीने की, बरना मोहब्बत तो किसी से भी हो जाती,
    अक्सर मैंने दुसरो को जिन्दगी में मोहब्बत
    धूढते देखा है,
    पर मैंने तो मोहब्बत को ही जिन्दगी बना लिया।।

    &_Keshav Sawarn
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