Headache

I’m suffering through headache,
Or let me say my mind is the one going through the  pain.
The pain goes down through my heart, rips through my rib cages.
It just crushed my body all oviously…

The pain of having to think about you 24/7.
The pain of wondering what else thing are you doing.
The pain of having to think of how you act, look, and feel when you also go through pain.
The pain of how you look like when you wake up.
Are you flawless like the river.
The pain of having to think of the first thing you do when you wake up.

Only God knows.
I want to be with you in the morning, afternoon, and evening.
I want to know how a typical day with you feels like.
My medulla oblongata always has you in mind. This is not Science. It is love.
The love I have for you is so immense, distance can’t handle it.

Distance feels it’s so long and wide,
it thought love wouldn’t reach us.
But it got it all wrong.
Love got tighter than a tough coconut covers.
But still my head hurts. It aches or what so ever.

Don’t know whether to follow Doctor’s advice of taking DISPIRIN.
But the truth of the matter is…
I don’t want to stop thinking about you.
So I’m going to let the love headache persist.
Image Source – Internet

This poem, ‘Headache’ is under copyright of ksLoOsEaCtIoN4B

&_Keshav Sawarn |

 © 2017 ksLoOsEaCtIoN4B

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ThErAuPtIc…LoVe-VII

And the question I ask myself a lot is,
if I barely even knew you,
why did it hurt so badly when you left?
That’s why I don’t like remembering you, because every time I think of you,
Unwillingly my mind think of how you hurt me,

Can you change this??

What…….if yess,

Then please my dear provide me the treatment……

Image Sorce – Internet

This poem, ‘ThErAuPtIc…LoVe-VII’ is under copyright of LoOsEaCtIoN.

&_Keshav Sawarn |

 © 2017 LoOsEaCtIoN

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कुसूर न तेरा है न कुसूर मेरा है!!!

वो मेरी भी है,वो तेरी भी है,
उसमे मैं भी हूँ,उसमे तुम भी हो,
उस से ही मैं हूँ,उस ही से तुम हो,
उस के लिये ही मैं हूँ,उस के लिये ही तुम हो,
क्यूँकि कुसूर न मेरा है, न कुसूर तेरा है।।

ख्वाब मैंने भी देखा,ख्वाब तुमने भी देखा,
मन्नते मेने भी मांगी ,मन्नते तुम ने भी मांगी,
गुज़ारिश में ने भी की,गुज़ारिश तुम ने भी की,
उसे जिंदगी मेने भी मानी,उसे जिन्दगी तुम ने भी मानी,
पर कुसूर न मेरा है,न कुसूर तेरा है।।

जिन्दगी में ने भी उसके नाम कर दी,जिन्दगी तुम ने भी उसके नाम कर दी,
मेरी भी साँस उसी के लिए ,तेरी भी साँस उसी के लिए,
मेरा नाम भी उसी के लिये,तेरा नाम भी उसी के लिए,
मेरा लहू भी उसी के लिये,तेरा लहू भी उसी के लिये,
पर क्या करे? कुसूर न मेरा है,न कुसूर तेरा है।।

मैं ने तो अपनी नब्ज़ अपने सनम के लिए कुर्बान की,
तुम ने तो अपने देश के लिए ही कुर्बान कर दी,
मेरे मौत पर चंद लोग मिलाबटी आँसु ले के आए,
तेरे मौत पर पूरी भीर दिल से आँसु ले आए,
मेरे जनाज़े में चार कन्धे भी न पुरे हुए,
तेरे जनाज़े में कन्धो की लाइन लगी हुई,
मेरे कफ़न के लिए उसने एक मीटर कपरा भी न दिया,
तेरे कफ़न के लिए तिरंगा ने खुद को सौख से झुका दिया,
अब पता चला! कुसूर न मेरा है,न कुसूर तेरा है।।

उस वक्त में अपने को अमीर समझता था,पर आज तुम अमीर हो,
में तो खव्बो में रहता था ,हकीकत से तुमने मुझे रुख्सक्त करबाया,
इतने के बाद भी में ने अपने आप को बद्किस्म्ती माना,पर तुमने अब भी अपने आप को खुस्किस्मती माना,
तभी तो न कुसूर तेरा है न कुसूर मेरा है।।

तुम तो मेरे लिए मरते हो,पर हम तो अपने भाई को भी नहीं छोरते है,
तुम तो बर्फीले माहोल में भी देश के लिए लरते रहते हो,पर हम भी तो blower चलाते है फिर अपने माँ-बाप से लरते रहते है,
तुमने मुझसे कभी कोई सबाल नहीं किया,पर मैं अब भी तुमसे सबुत मांगता हूँ,
तुम सिने पर गोली खाने से पहले कभी नहीं सोचते,पर में भी तो तुम्हारे अभिमान-गरिमा को छेरने से पहले कभी नहीं सोचता हूँ,
अब भी क्या यही सोचते हो?
कुसूर न तेरा है न कुसूर मेरा है?

&_Keshav Sawarn|© 2017 LoSeAcTiOn

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